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बुलंदशहर के जिला महिला अस्पताल में नवजात शिशु बदलने का एक गंभीर मामला सामने आया है। अस्पताल स्टाफ की लापरवाही के कारण एक महिला को उसके बेटे के बजाय बेटी सौंप दी गई। परिजनों के विरोध और हंगामे के बाद अस्पताल प्रशासन हरकत में आया और जांच के लिए एक टीम गठित की गई है।
खुर्जा के आबदा नगर निवासी अरमान की पत्नी नफीसा ने 29 अप्रैल को कल्याण सिंह राजकीय मेडिकल कॉलेज से संबद्ध जिला महिला अस्पताल में बेटे को जन्म दिया था। वहीं, लखावटी निवासी युनुस की पत्नी फिजा ने शिकारपुर सीएचसी पर बेटी को जन्म दिया। नवजात की तबीयत बिगड़ने पर फिजा और उसके बच्चे को जिला महिला अस्पताल रेफर किया गया, जहां दोनों नवजातों को एसएनसीयू वार्ड में भर्ती किया गया था।
इसी बीच, नफीसा की तबीयत बिगड़ने पर शनिवार सुबह उसे मेरठ रेफर किया गया। आरोप है कि रेफर करते समय अस्पताल स्टाफ ने एसएनसीयू वार्ड से बच्चा लाने में लापरवाही बरती और नफीसा को उसके बेटे के बजाय फिजा की बेटी दे दी।
मेरठ पहुंचने के बाद जब परिजनों को नवजात को लेकर शक हुआ, तो यह मामला उजागर हुआ। इसके बाद बुलंदशहर अस्पताल प्रशासन हरकत में आया और तीन कर्मचारियों की एक टीम मेरठ भेजी गई। टीम ने सही नवजात की पहचान कर बच्चे को बदलकर उसके वास्तविक परिजनों को सौंपा।
घटना के बाद परिजनों ने अस्पताल में जमकर हंगामा किया और जिम्मेदार कर्मचारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की। अस्पताल के सीएमएस डॉ. अजय पटेल ने बताया कि मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच टीम गठित कर दी गई है और मेरठ से बच्चा लाकर परिजनों को सौंप दिया गया है।
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