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मेरठ की सेंट्रल मार्केट प्रकरण में सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर आवास एवं विकास परिषद ने स्कीम नंबर - सात के तहत आवासीय भवनों में व्यावसायिक गतिविधियों पर अबतक 815 संपत्तियों पर नोटिस जारी किया है। पूरी स्कीम में 42 ऐसे अल्प और कमजोर आय वर्ग के लोगों भी मकान हैं, जिनमें सेट बैंक का प्रावधान आवंटन के समय नहीं था। ऐसे में अब इन भवनों में सेट बैंक छोड़ने की अनिवार्यता नहीं होगी।
आवास विकास विभाग के अफसरों के मुताबिक सेक्टर-एक से 13 तक स्कीम नंबर सात में कुल 860 आवासीय संपत्तियों में व्यावसायिक गतिविधियां चिह्नित की गई थीं। इनमें से 815 संपत्तियों पर कार्रवाई चल रही है। इनमें से 710 पर नोटिस चस्पा किया जा चुका है। सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार इन दुकानदारों को दो सप्ताह का समय दिया गया है। यदि निर्धारित समय में निर्माण नहीं हटाया गया तो जिला प्रशासन ध्वस्तीकरण की कार्रवाई
इन भवनों के स्वामियों को मिल सकेगी राहत
करेगा और उसका खर्च भी दुकानदारों से ही वसूला जाएगा। बृहस्पतिवार को जब आवास विकास की टीम नोटिस चस्पा करने पहुंची थी तो महिलाओं ने कड़ा विरोध किया था। महिलाओं ने न केवल नोटिस फाड़े थे बल्कि अधिकारियों को लौटने पर मजबूर भी कर दिया था। सुप्रीम कोर्ट का आदेश है कि सभी को नोटिस भेजा जाए। ऐसे में जिन भवनों पर नोटिस चस्पा नहीं हो सके हैं, उन्हें सोमवार से डाक के जरिए भेजा जाएगा।
उप आयुक्त आवास अनिल कुमार सिंह ने बताया कि स्कीम नंबर सात में 42 ऐसे मकान हैं, जिनमें सेट बैक छोड़ने का प्रावधान योजना के विकसित होने के दौरान नहीं किया गया। इनमें अधिकांश भवन कोने के हैं, जिनका फ्रंट बहुत कम है और चारों ओर से घिरे हैं।
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